कांकरी डूंगरी संघर्ष समिति का धरना जिला मुख्यालय पर लगातार सातवें गुरुवार को रहा जारी


विधानसभा के बजट सत्र ने उठाया जाएगा मुद्दा : विधायक डिण्डोर

कांकरी डूंगरी प्रकरण में कुछ लोंगो पर दर्ज की झूठी एफआईआर


डूँगरपुर/संतोष व्यास। आदिवासी जनप्रतिनिधि सेलेक्शन प्रणाली के द्वारा चयनित जनप्रतिनिधियों के तत्वाधान में नेशनल हाइवे नम्बर 8 पर वर्ष 2020 में कांकरी डूंगरी पर हुए घटनाक्रम के बाद से लगातार पुलिस प्रशासन द्वारा आदिवासी समाज के युवाओं को प्रताडि़त करने एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज किये जा रहे फर्जी मुकदमे वापस लेने की मांग को लेकर हर गुरुवार को जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट गेट के बाहर दिए जा रहे एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन के तत्वाधान में 27 जनवरी को लगातार सातवें गुरुवार को आदिवासी परिवार के बैनर तले जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट गेट के बाहर धरना दिया गया तथा मुख्यमंत्री के नाम उपखण्ड अधिकारी मणिलाल तीरगर को ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में बताया है कि अनुसूचित क्षेत्र में संवैधानिक हक अधिकार के लिए राज्य सरकार से संवाद उपरांत मांगे मनवाने हेतु लोकतांत्रिक तरीके से धरना प्रदर्शन कर रहे प्रशिक्षित बेरोजगारों के बीच राजनीतिक षड्यंत्र के तहत उपद्रवी भेजकर कांकरी डूंगरी नेशनल हाईवे 8 पर उपद्रव कराकर निर्दोष सामाजिक कार्यकर्ताओं पर जबरन जूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें प्रताडि़त किया जा रहा है। कांकरी डूंगरी प्रकरण में आदिवासी समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है जिसे रोकने की आवश्यकता है। 

सागवाड़ा विधायक रामप्रसाद डिण्डोर ने कहा कि कांकरी डूंगरी प्रकरण में सरकार का भी यह मानना है कि कुछ लोगो पर गैरकानूनी रूप से मुकदमे दर्ज किए गए है जिसमें ऐसे लोगों पर भी मुक़दमे दर्ज किए गए जो मौके पर नही थे। उन्होंने बताया कि गुरुवार को हुई जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक में भी कांकरी डूंगरी प्रकरण को लेकर जिला परिषद सदस्यों एवं पंचायत समिति के प्रधान ने मुद्दा उठाया था जिसके बाद यह बात सामने आई कि इस पूरे प्रकरण में कुछ निर्दोष लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए है जिस पर जांच चल रही है। विधायक ने उक्त मामले को लेकर विधानसभा के बजट सत्र में आवाज उठाने की भी बात कही और कहा कि पूरे मामले को लेकर राज्य सरकार को अवगत करवाया जाएगा तथा जल्द ही इस मामले का निस्तारण कर निर्दोष लोगों एवं बेरोजगारों को राहत प्रदान की जाएगी।

जनप्रतिनिधियों ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री जल्द से जल्द मामले को लेकर संज्ञान ले तथा फर्जी मुकदमे हटवाकर आदिवासी समाज के युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को न्याय दिलाये। आदिवासी समाज के जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले सात गुरुवार से जिला मुख्यालय पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जा रहा है लेकिन अब तक जिला प्रशासन द्वारा कांकरी डूंगरी घटनाक्रम में दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लेने संबंधित किसी भी प्रकार का आश्वासन जनप्रतिनिधियों को नहीं दिया गया है। ऐसे में अब धरना प्रदर्शन को आने वाले समय में उग्र किया जाएगा तथा पूरे जिले के आदिवासी समाज के लोग डूंगरपुर जिला मुख्यालय पर एकत्रित होंगे तथा राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। धरना प्रदर्शन के दौरान राज्य सरकार के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त करते हुए नारेबाजी की गई। इस अवसर पर सागवाड़ा विधायक रामप्रसाद डिण्डोर, झोथरी प्रधान अनिता रोत, दोवड़ा प्रधान सागर अहारी, साबला प्रधान ललिता मीणा, अनुतोश रोत, बीपीएमएम प्रदेश प्रचारक मुकेश कलासुआ, पोपट खोखरिया, जिला परिषद सदस्य माया कलासुआ, पार्वती मीणा, वीणा कटारा, रामदेव डामोर, अनिल कटारा, सुरमाल रोत, किरपा मेंणात, पार्वती डोडा, पंचायत समिति सदस्य, आजाद कलासुआ, सरपंच, वार्डपंच एवं आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता उपस्थित रहें।

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