25 हजार की आबादी, व्यापारिक केंद्र, राष्ट्रीयकृत बैंक महज एक

 न पर्याप्त स्टाफ, न सुचारू एटीएम, बैंक में लंबी कतारें, उपभोक्ता परेशान


ओबरी। (चन्द्रेश एच. कलाल )
उपतहसील मुख्यालय में बैंक ऑफ  बडौदा एक मात्र राष्ट्रीयकृत बैंक है। इसमें कस्बे सहित आसपास क्षेत्र के गांवों के हजारों लोगों के खाते हैं। इन लोगों को नेट और भारी भीड़ की समस्याओं से परेशानी हो रही है। रोजाना घंटों तक लाइन में लगने के बाद व्यापारियों से लेकर पेंशन, किसान, छात्र व महिला उपभोक्ताओं को कभी कबार खाली हाथ लौटना पड़ता है। इस समस्या से निजात पाने अब बैंक उपभोक्ताओं सहित गणमान्य नागरिक कस्बे में भारतीय स्टेट बैंक या अन्य बैंक की शाखा खोलने की मांग प्रशासन से कर रहे हैं। वहीं, उपतहसील मुख्यालय में बैंक ऑफ बडौदा की एटीएम मशीन हर समय बीमार होने से उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। क्षेत्र का एक मात्र राष्ट्रीयकृत बैंक के एटीएम में दिनभर उपभोक्ताओं की कतारें लगी रहती है। बैंक बंद होने के बाद रुपए निकालने के लिए लोगों को अगले दिन बैंक खुलने का इंतजार करना पड़ता है। अक्सर यह मशीन बीमार ही दिखाई देती है। मशीन के बीमार होने से उपभोक्ताओं को बैंक में जाकर ही रुपए निकालने पड़ते हैं। ओबरी में स्थित बीओबी शाखा में क्षेत्र के करीब बीस से अधिक गांव-ढाणियों के उपभोक्ता लेन-देन करने आते हैं। बैंक में हररोज बड़ी संख्या में उपभोक्ता उमड़ते हैं। लंबी कतार लगने से उनका बैंक संबंधी कार्य पूरा नहीं हो पाता है। त्यौहारी सीजन के समय रुपए निकालने में उपभोक्ताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 

बैंक में हर समय रहती भीड़

बैंक में ओबरी के साथ ही फावटा, गड़ा वेजणिया, पारड़ा मेहता, सुरमणा, अंबाड़ा, विराट, बरबोदनिया, बिलिया बडगामा, केसरपुरा, जोहरा पटली, डैयाणा, घाटा का गांव, चाडौली, थाम का तालाब, मेवड़ा सहित अन्य गांव-ढाणियों से ग्रामीण पहुंचते हैं। ऐसे में बैंक परिसर उपभोक्ताओं से खचाखच भरा रहता है। बुजुर्ग अपनी पेंशन, मजदूर नरेगा राशि, तो विद्यार्थी अपनी छात्रवृत्ति को लेकर बैंक के चक्कर लगाते हैं, लेकिन भीड़ अधिक होने से मायूस होकर लौटना पड़ता है। 

अव्यवस्थाओं को लेकर नागरिक आक्रोशित

कस्बे में एक मात्र राष्ट्रीयकृत बैंक बैंक ऑफ बडौदा में क्षेत्र के करीब 30 हजार बचज खाता धारक, करीब २३० चालु खाता सहित लाखों रूपए की एफडी व आरडी हैं। इनमें कर्मचारी, किसान, व्यापारी, छात्र, पेंशनर सहित जन-धन बीमा योजना के तहत खोले गए आम लोगों के खातेदार शामिल हैं। एक मात्र बैंक पर कई वर्षों में वर्क लोड अधिक बढऩे के साथ बैंक में लोगों की भीड़ बढ़ गई है। ऐसे में बैंक उपभोक्ताओं के पास विकल्प के रूप में अन्य बैंक नहीं होने से परेशानी झेल कर इसी बैंक से काम करना पड़ता है। इन अव्यवस्थाओं को लेकर नागरिक आक्रोशित होने के साथ अब प्रशासन से अन्य बैंक की शाखा और एटीएम बूथ खोलने की मांग उठाने लगे हैं।

ना लॉकर, ना गोल्ड लोन सुविधा

व्यावसायिक केन्द्र ओबरी कस्बे में वर्तमान में एक ही राष्ट्रीयकृत बैंक बैंक ऑफ बडौदा है जो, ओबरी क्षेत्र के विकास एवं समय के हिसाब से नाकाफी है। धीरे-धीरे विकास की ओर कदम बढ़ाते हुए ओबरी कस्बा क्षेत्र की करीब २५ पंचायतों का राजनैतिक, समाजिक एवं मुख्य व्यावसायिक केन्द्र बन गया है। जहां करीब ४०० से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होने के बावजूद कस्बे में ना तो लॉकर, ना ही गोल्ड लोन सुविधा उपलब्ध है। इस सुविधा को लेने के लिए लोगों को सागवाड़ा के अगल-अलग बैंको का रूख करना पड़ता है। अगर कोई अन्य राष्ट्रीयकृत बैंक या निजी बैंक इस सुविधा के साथ ओबरी में खुलती है तो, बैंक के साथ हर उस व्यक्ति को लाभ होगा। जो सागवाड़ा सहित अन्य शहरो को रूख अपनाते है। 

महिलाओं के लिए भी आफत

बैंक में उपभोक्ताओं की भीड़ बनी रहती है। इस कारण बैंक में महिला उपभोक्ताओं को अंदर तक जाना जोखिम भरा होता है। भीड़ अधिक होने के बाद भी बैंक प्रबंधन ने कोई भी गार्ड नहीं रखा है, जो इस भीड़ को काबू कर सके। इस कारण लोगों को अपना काम करने कस्बे से १५ किमी दूर सागवाड़ा नगर की बैंकों में जाना पड़ता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इस बैंक में जिस व्यक्ति का काम हो जाता है, वह अपने आपको धन्य समझता है। नेटवर्क प्रॉब्लम और कर्मचारियों के काम की धीमी गति देख कर आम नागरिक परेशान हैं। इन समस्याओं को देखते ह़ुए कस्बे में स्टेट बैंक या अन्य राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खोलना अति आवश्यक हो गया है।

बनी रहती है जाम की स्थिति 

कस्बे में एक मात्र राष्ट्रीयकृत बैंक बैंक ऑफ बडौदा होने से बैंक में भीड़ के साथ वाहनों को दबाव भी रहता है। जिससे जाम की स्थिती हमेशा बनी रहती है। गौरतलब है कि बैंक कस्बे के मुख्य मार्ग पर स्थित है जहां बैंक में आने वाले खाताधारक लेकर आते है और वहीं बैंक के सामने मुख्य मार्ग पर इधर-उधर पार्क कर देते है। जिससे दोनों और आने जाने वाले बड़े वाहनों को काफी मशक्त करनी पडती है। 


‘‘बैंक में कुछ दिन पहले राउटर खराब होने सर्वर की समस्या जरूर आई थी। जिसे ठीक करवा दिया गया है। गोल्ड लोन का तो बैंक की पॉलिसी है लॉकर का रहा सवाल तो अगर व्यापारी मांग करते है तो लॉकर को लेकर जोनल ऑफिस में चर्चा की जाएगी।’’ 

-  शाखा प्रबंधक, बीओबी ओबरी 


‘‘एक ही बैंक होने से अधिकारियों की मनमानी भी रहती हैं। इससे हमें भारी परेशानी उठाना पड़ती है। एक काम के लिए कई दिनों तक बैंक के चक्कर लगाना पड़ते हैं। कस्बे में अन्य बैंक की शाखा खोली जानी चाहिए।’’ 

- तेजसिंह चौहान, किसान 


‘‘कस्बे में स्टेट बैंक की शाखा या अन्य बैंक की शाखा जरूरी है। शाखा नहीं होने से हमारा व्यवसाय प्रभावित होता है।  बैंक में भीड़ होने से रोजमर्रा के लेन देन के लिए सागवाड़ा जाना पड़ता है। इससे परेशानी के साथ समय भी खर्च होता है।’’ 

- लोकेश संघवी, व्यापारी, ओबरी


‘‘कस्बे में एक मात्र राष्ट्रीयकृत बैंक बैंक ऑफ बडौदा होने से बैंक में भीड़ हमेशा बनी रहती है। जिससे रोजमर्रा के कार्य भी समय पर नहीं हो पाते है। इसलिए ओबरी कस्बे में एक और राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खुलनी आवश्यक है’’  

- नटवरलाल पटेल, पूर्व उपसरपंच, ओबरी 


‘‘इन्होंने बताया इसलिए जरूरी है एक और बैंक की शाखा का खुलना शासकीय संस्थाओं के अधिकारियों व कर्मचारियों के पास अधिक समय नहीं रहता है। बैंक में घंटों लाइन में लगना पड़ता है। इस कारण छोटे बड़े लेनदेन के लिए अवकाश लेना पड़ता है।’’ 

- दिंकल कलाल, शिक्षक


फोटो केप्शन 

उपतहसील मुख्यालय पर एक मात्र राष्ट्रीयकृत बैंक  बैंक ऑफ  बडौदा। 

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