- स्वच्छता एवं पर्यावरण का आजादी से भी बड़ा महत्व
- जीना है तो अपनाना होगा स्वच्छता एवं पर्यावरण, प्रकृति से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी धरती
जयपुर। डूंगरपुर शहर को आदिवासी अंचल में समाया हैं परंतु एक व्यक्ति की इच्छा शक्ति से स्वच्छता, पर्यावरण, जल संचय - जल संरक्षण से अपनी पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई हैं। वर्तमान में आमजन ने इसकी उपयोगिता एवं महत्वता को नजदीक से समझा हैं। वर्तमान में 2 वर्षों से कोरोना की इस महामारी से देश गुजरा हैं। कोई भी इससे अछूता नहीं रहा परंतु डूंगरपुर शहरवासी अन्य शहरों में रहने वाले आमजन से ज्यादा सुरक्षित अपने आप को समझने लगे। इसके पीछे शहर की साफ़- सफाई, 51000 की बस्ती में 25000 बड़े-बड़े पेड़ तथा शुद्ध जल का बहुत बड़ा रोल रहा था। पेड़ों से ऑक्सीजन का वातावरण में फैलना तथा पेड़ों द्वारा जहरीली गैसों को ग्रहण करने से हमें उसका लाभ सीधा-सीधा मिला। अभी फिर सोशल मीडिया पर बिल गेट्स मरीना द्वारा तीसरी लहर के घातक होने की बात कहने से आम चिंतित हुआ हैं। स्वच्छता का महत्व एक ऐसा विषय है, जो शायद हर उम्र के लिए समान महत्व रखता है। किसी के जीवन में इसका महत्व व्यक्ति विशेष के तौर पर उतना ही है, जितना कि एक छोटे से बालक के जीवन में होता है। स्वच्छता अच्छी आदतों मे से एक होती है और अच्छी आदतें सबको अपनी ओर आकर्षित करती हैं और जब जीवन में सब का सही मिश्रण हो तो उस व्यक्ति का अलग ही नाम होता है। जीवन में स्वच्छता का महत्व इतना ज्यादा है कि हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी ने भी, इसे समझते हुए स्वच्छ भारत अभियान जैसे राष्ट्र स्तरीय कार्यक्रम चलाए। जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को स्वच्छ बनाने के साथ-साथ पूरी तरह खुले में शौच मुक्त बनाना है। गंदगी के कारण कई सारी जानलेवा बिमारियां फैलती हैं और इनसे बचने का सबसे अच्छा तरीका है, दैनिक रुप से अपने शरीर, घर, आस-पास के क्षेत्र, स्कूल, कार्यालय कि सफाई। जरुरी नहीं कि हर जगह आप को ही सफाई करनी हो, आवश्यकता है जागरूकता की। कभी भी यहां-वहां कूड़ा न फेकें और कोई फेके तो उसे समझाएं। देश के सच्चे नागरिक होने के नाते सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करें, अपने स्कूल, कार्यालय को साफ रखें। स्वच्छता हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। और बिना इसके शायद एक व्यवस्थित जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जैसा कि हमारे लिये सांस लेना, भोजन करना जरूरी होता है, ठीक उसी प्रकार स्वच्छता भी जरुरी है। और हम सब के जीवन में इसका महत्व बहुत ज्यादा है। स्वच्छता हर क्षेत्र के लिये महत्वपूर्ण है। चाहे आप जहां भी जाएं जैसे कि स्कूल, घर, मंदिर, कार्यालय आदि। स्वच्छता हर जगह के लिये समान महत्व रखती है। हम जितना अपने घर को साफ रखते हैं, हमें दूसरी जगहों को भी उतना ही साफ रखना चाहिये, कभी भी सार्वजनिक स्थानों को गंदा नहीं करना चाहिये। क्यों कि वे देश के धरोहर हैं, और हमारा देश हमारी पहचान है। जब तक हम अपने धरोहर कि रक्षा नहीं करेंगे, तो हमारे यहां आने वाले पर्यटक कहां से करेंगे। इस लिये स्वच्छता जरुरी है और इसका महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।
जैसे भोजन, पानी, ऑक्सीजन और अन्य चीजें हमारे अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं वैसे ही हमारे स्वस्थ शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए स्वच्छता भी महत्वपूर्ण है। क्या हम मलेरिया, पीलिया आदि जैसी बीमारियों से मरने वाले लोगों के बारे में खबरें नहीं सुनते हैं, जो गंदे परिवेश में पनपती हैं? इसलिए इस तरह के मामलों को रोकने के लिए भारत के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए जो हमारे देश की यात्रा करने वाले विदेशियों की नजऱ, आत्मा और दिलों-दिमाग में सम्मानजनक स्थान हासिल करने में मदद करेगा।
प्राचीन काल से ही पर्यावरण का बहुत महत्व रहा है, वास्तव में प्रकृति का संरक्षण ही उसका पूजन है। हमारे भारत में पर्वत, नदियां, वायु, आग, ग्रह नक्षत्र, पेड़ पौधे आदि सभी से मानवीय संबंध जोड़े गए हैं। वृक्षों को संतान स्वरूप और नदियों को मां स्वरूप माना गया है। हमारे ऋषि मुनियों को ज्ञात था कि मानव स्वभाव कैसा होता है, मानव अपने लालच में किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसलिए उन्होंने प्रकृति के साथ मानवीय सम्बन्धों को विकसित किया।
पर्यावरण को सुरक्षित रखना उतना ही जरुरी है जितना हम अपने आप को रखते है। पर्यावरण से ही हमे वो सभी चीजे उपलभ्ध होती है, जिसका इस्तेमाल करके आज मानव जीवित है और आराम और सुखदायी जीवन व्यतीत कर रहा है। पर्यावरण संरक्षण हमारा फर्ज है और इस जिम्मेदारी को हम सबको मिल कर निभाना चाहिए। हमे जितना हो सके उतना पर्यावरण को दूषित होने से बचाना चाहिए और प्रदुषण को रोकने के उपायों को अमल में लाना चाहिए। मनुष्य ने सभ्य बनने और दिखने के प्रयास में पर्यावरण को दूषित कर दिया हैं। पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखना मानव तथा जीव जंतुओं के हित में हैं। आज विकास के नाम पर होने वाले कार्य पर्यावरण के लिए संकट बन गये हैं। पर्यावरण के संरक्षण की आज महती आवश्यकता हैं। पर्यावरणीय समस्या का यह अल्पकालिक सुधार न तो स्थायी समाधान है और न ही वांछनीय परिणाम। हालांकि वर्तमान स्थिति को प्रकृति की ओर से दी हुई चेतावनी समझनी चाहिए जो मनुष्य की जीवन शैली और विकास प्रक्रिया के तौर-तरीकों को बदलने का अवसर प्रदान करता है। इतिहास ऐसे कई उदाहरणों से भरा पड़ा है जो यह साबित करता है कि महामारियों का गहरा प्रभाव पर्यावरण पर पड़ा है, परंतु महामारी के फौरन बाद आर्थिक विकास की रफ्तार को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का बड़े पैमाने पर अमर्यादित दोहन भी किया गया है। ऐसे में कोरोना महामारी से उत्पन्न अल्पकालिक पर्यावरणीय सुधार से बहुत अधिक खुश होने की जरूरत नहीं है, बल्कि मानव, प्रकृति और आर्थिक विकास के अंतर्संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता है।
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