मैं स्वतन्त्रता की शक्ति हूँ, मैं कविता हूँ... मैं कविता हूँ प्रकृति की छाँव में हुई काव्य गोष्ठी, सुंदरपुर गाँव में वागड़ विभा ने किया आयोजन

 


डूंगरपुर। वागड़ विभा साहित्य एवं कला संस्थान डूंगरपुर द्वारा शहीद दिवस पर निकटवर्ती सुंदरपुर गांव में आयोजित काव्य गोष्ठी खूब जमी और प्राकृतिक वातावरण में कोई चार घंटे तक नगर के रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से समां बांध दिया।

सुंदरपुर स्थित विजय लक्ष्मी फार्म हाउस पर वरिष्ठ कवि एडवोकेट नरेश जोशी भारतीय की अध्यक्षता में आयोजित काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि समाजसेवी कुलदीप भट्ट रहे। गोष्टी की शुरुआत कवयित्री श्रीमती पायल शर्मा द्वारा त्रिभंगी छंद में प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। पहले चरण में बालकवि वेदांग पंड्या ने मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ अपना आक्रोश जताते हुए अपनी रचना ऐसी व्यवस्था से तो जिल्लत मुझे प्यारी है जहां जूनियर सीनियर के प्रभारी हैं...सुनाकर सभी को सोचने पर विवश कर दिया। हितेश वसीटा ने अफगानिस्तान में हुए घटनाक्रम को रेखांकित करते हुए कविता इंधन सस्ता जीवन सस्ता, आतंक वहां पर नाच रहा... के जरिए विश्व को सावचेत किया। वरिष्ठ कवयित्री पायल शर्मा ने अपनी कविता उम्र के अवशेष माथे की शिकन गर पढ़ो तुम... सुनाकर उम्र के हर पड़ाव का बेहतरीन चित्रण किया। 

राजेश पण्ड्या द्वारा कोरोना पर प्रस्तुत पैरोडी लागा मुँह पे ये मास्क मैं खाऊं कैसे..., अजहु न जावे कोरोना सावन बीतो जाय.. ने खूब गुदगुदाया। बाल रचनाकार जियाश्री पंड्या ने महान कवि रामधारी सिंह दिनकर की रचना कलम आज उनकी जय बोल कंठस्थ सुना कर अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से सभी का मन जीत लिया। विशाल पंचाल द्वारा माता पिता को केंद्रित रचना को खूब सराहा गया। कवियत्री मनीषा पंड्या ने प्रेम में वियोग की हृदयस्पर्शी कविता तुम पूछते हो ना हर बार मेरे जीवन के पन्नों का सच.. का बेहतरीन प्रस्तुतीकरण किया। नरेंद्र शर्मा बोधा ने अपनी कविता इकरार अभी बाकी है तकरार अभी बाकी है... सुना कर प्रेमी प्रेमिका के मनोविनोद को चित्रित किया। जयेश शर्मा जय ने तथाकथित शांतिदूतों पर करारा कटाक्ष करती अपनी कविता पर कटे कबूतर शांति के उडऩे लगे दागदारो के दाग भी उडऩे लगे... सुना कर वाहवाही लूटी। 

नवोदित रचनाकार जयदीप भट्ट ने शहर में बड़ा शोरगुल था हर इंसान एक दूजे से दूर था, जगमगाती रोशनी की चकाचौंध से गांव मेरा थोड़ा दूर था... सुनाकर सुकूनदायी ग्रामीण परिवेश पर बेहतरीन अभिव्यक्ति दी। वरिष्ठ कवि विनय सोमपुरा ने दोहा छंद मुक्तक क्षणिका प्रस्तुत करने के साथ ही अपनी गज़़ल बड़ी मासूम सी लगती है वह बचपन की तरह नजर में तल्खय़िां हैं लडक़पन की तरह... सुनाकर खूब दाद पाई। वरिष्ठ कवि सत्यदेव पंचाल सत्येश की गज़़ल तेरी नफरतों से भी मैं जीत जाऊंगा गम पियूंगा और पीता जाऊंगा.. सुनाकर समा बांध दिया। 

वरिष्ठ गीतकार हेमंत शर्मा द्वारा प्रस्तुत गीत आंखें ढूंढती है किसे कोहरे में डूब कर...और दे ना पाया तुम्हें प्यार का एक पल जिंदगी भर का कैसे मैं विश्वास दू...ने गोष्टी को नई ऊंचाइयां प्रदान की। वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश शर्मा गुंजन ने प्रभु की दी हुई सांसो को यूं व्यर्थ ना गंवाइए.. के जरिए मानव को सत्कर्म करने का संदेश दिया वही उनकी रचना मैं स्वतंत्रता की शक्ति हूं मैं कविता हूं मैं कविता हूं... ने लेखनी की ताकत को उजागर किया। वागड़ विभा के अध्यक्ष राजकुमार कसारा ने अपनी रचना ख्वाहिशें जरूरी है जीने के लिए, जिंदगी को जी भर जीने के लिए... सुनाकर जिंदगी जीने का फलसफा बयान किया। वरिष्ठ गज़़लकार नरेश जोशी भारतीय की गज़़ल उनसे मिलना हो ही गया ख्वाब में चेहरा छुपा रहे थे जो नकाब में.. ने खूब वाहवाही लूटी।

काव्य गोष्ठी में श्रीमती मधुकांता भट्ट, श्रीमती प्रज्ञा भट्ट ने देश भक्ति गीत अपनी आजादी को हम हर गीत मिटा सकते नहीं..., बाल कलाकार प्रणय भट्ट ने जहां डाल डाल पर सोने की चिडिय़ा करती है बसेरा... तथा प्रयान भट्ट ने मरता था मरता रहूंगा देश की सेवा करता रहूंगा... माहौल को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। काव्य गोष्ठी का संचालन राजकुमार कसारा ने किया जबकि अनुषा भट्ट ने आभार व्यक्त किया।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ