निम्बाहेडा। साहित्य परिषद श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के द्वारा यज्ञशाला प्रांगण में शनिवार प्रात: 11 बजे से मेघदूतम एक अध्ययन इस विषय को केंद्रित कर व्याख्यान का आयोजन कोविड नियमों की पालना को ध्यान में रखकर किया गया। व्याख्यान में विश्वविद्यालय के सभी कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने बढ़ चढक़र भाग लिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रभारी साहित्य परिषद डॉ स्मिता शर्मा ने बताया कि महाकवि कालिदास का मेघदूत युवाओं को प्रेरणा देने वाला है, क्योंकि यक्ष अपने कर्म से हीन हो गया और उसका समाज में कोई अस्तित्व नहीं रहा, जो युवा परिश्रमी नहीं होंगे वह अपने कार्य में कभी सफल नहीं हो सकते और उन्हें दर-दर की ठोकरें भी खानी पड़ेगी। कुलसचिव ने बताया कि साहित्य परिषद की यह अनूठी पहल है किसी भी ग्रंथ को देखने और समझने की हर किसी की अपनी दृष्टि होती है। विद्यार्थियों को श्रम शील होना चाहिए। परिश्रमी बनना चाहिए और अपने पाठ्य चर्चा के माध्यम से व्यवहार जगत को भी व्यवस्थित करना चाहिए। डॉ अशोक शर्मा ने बताया कि किसी भी विषय वस्तु को समझने के लिए भाव पक्ष और कला पक्ष पर जोड़ दिया जाता है। महाकवि कालिदास के ग्रंथों में मेघदूत खंड काव्य या गीति काव्य के नाम से प्रसिद्ध है और इसका कला पक्ष अन्य साहित्य ग्रंथों से मजबूत है। डॉ मनीष शर्मा ने बताया कि मेघदूत में दृष्टि विज्ञान गंधर्व नगर ज्योतिष शास्त्र के शकुन अपशकुन और आधुनिक विज्ञान के सारे विषय भरे पड़े हैं। योग विभाग के सहायक आचार्य जसवीर ने बताया कि मेघदूत में व्यक्ति के खानपान और ऋतु के अनुसार भोजन आदि की व्यवस्था बताई गई है। डॉ लोकेश चौधरी ने बताया कि मेघदूत एक कालजई ग्रंथ है जिस पर और अधिक शोध कार्य करने की जरूरत है। विषय प्रवर्तन करते हुए विश्वविद्यालय प्रवक्ता डॉ मृत्युंजय तिवारी ने बताया की महाकवि कालिदास विरचित मेघदूत जीवन का आधार कर्म को केंद्रित कर हमारे कर्म को बताता है, क्योंकि कर्म से हीन व्यक्ति इस लोक में सुख पाता है न पारलौकिक जीवन में ही सुख पा सकता है। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से आचार्य कक्षा से मणिकांत द्विवेदी शास्त्री, तृतीय वर्ष से अमरीश त्रिपाठी शास्त्री, द्वितीय वर्ष से ओम पांडे राजेश व्यास शास्त्री, प्रथम वर्ष से हर्षल व्यास के साथ ही अन्य विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियां दी।
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