डूंगरपुर। राज्य सरकार ने आनन फानन में पेंशनरों एवं सेवारत राज्य कर्मियों के लिए आर जी एच एस योजना को लागू कर दिया है। जिसमें वृद्ध पेंशनरों को आउट डोर व इन डोर चिकित्सा में निरंतर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन कठिनाइयों के कारण पेंशनरों को बिना दवाई के रखने की योजना फलीभूत होती दिख रही है। कुछ समय बाद पेंशनर्स का इस योजना से मोह भंग हो जाएगा तथा पेंशनर्स बहुत बड़े संकट के दौर में जाने वाले हैं। यदि पेंशनर समाज की राज्य इकाई कुछ नहीं कर पा रही है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। रोज नए नए फरमानों ने पेंशनर्स के नाक में दम कर दिया है। अंधेर नगरी चौपट राजा जैसी स्थिति बनती जा रही है। एक तरफ दवा विक्रेताओं ने पेंशनर्स की मजबूरी का फायदा उठाना शुरू कर दिया है,वही दूसरी ओर बिना दवाई दिए राशि की कटौति हो रही है, यही नहीं ई-मित्रों ने चांदी बनाना प्रारंभ कर दिया है। नए फरमान के तहत पेंशनर अपने चिकित्सक से दवाई लिखवाने के बाद टीआईडी जनरेट करने पर ही दवा विक्रेता से दवाई प्राप्त कर सकेगा। कई पेंशनर इस झंझट में न पडक़र दवाई अपने पैसे से खरीदकर ला रहे हैं। दूसरा झंझट लिमिट खत्म हो जाने पर भी ई मित्र पर जाकर लिमिट बढ़ाने की कार्यवाही करने की बाध्यता है। सित्तर वर्ष से अधिक आयु व फैमिली पेंशनर्स की दुर्गति अधिक हो रही है। आश्चर्य तो इस बात का है कि पेंशन जो पहले बैंक द्वारा दी जा रही थी अब ट्रेजरी के माध्यम से मिलेगी तथा दवाई की राशि जो ट्रेजरी के माध्यम से मिल रही थी,अब सीधे जयपुर से ऑन लाइन कार्यवाही पर मिलेगी। पेंशनरो के लिए पुरानी व्यवस्थाओं को अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रत्येक पेंशनर को अपने सेवाकाल में जिंदगी भर आरपीएमएफ में कटौति करवाने के बाद ये सिला मिल रहा है। इससे अच्छा तो पहले वाली योजना ही सुविधाजनक थी। क्या कोई ऐसा है जो सारा मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा दें कि सम्बंधित अधिकारी पेंशनर्स के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। क्या वे किसी बड़े आंदोलन की बाट जोह रहे हैं क्या बूढ़ों को भी भूख हड़ताल, धरना, ज्ञापन आदि के मार्ग पर चलना पडेगा। इस योजना में अविलम्ब परिवर्तन या संशोधन होना चाहिए।
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