सीमलवाड़ा सीएचसी क्षेत्र का सबसे बड़ा अस्पताल, 10 में से 2 डॉक्टर के भरोसे मरीज


सीमलवाड़ा। डूंगरपुर जिले के सीमलवाडा ब्लाक के सबसे बड़े सीमलवाडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बुरे हाल है।  अस्पताल में डॉक्टर्स के 10 पद स्वीकृत है लेकिन पूरा अस्पताल 2 ही डॉक्टर्स के भरोसे चल रहा है।  वही 2 में से एक डॉक्टर ने डॉक्टर्स लगाने की मांग को लेकर अवेतनिक अवकाश का निर्णय लिया है।   ऐसे में इलाज व उपचार के लिए अस्पताल आ रहे मरीजो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  

स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार तमाम दावे कर रही है। नए अस्प्ताल खोले जा रहे है, लेकिन डूंगरपुर जिले में हकीकत में अस्पतालों में इलाज करने वाले डॉक्टर ही नही है। कुछ ऐसे ही हालात डूंगरपुर जिले के सीमलवाडा ब्लाक के सबसे बड़े सीमलवाडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के है।  सीमलवाडा अस्पताल में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग की ओर से डॉक्टर्स के कुल 10 पद स्वीकृत है।  जिसमे से सिर्फ 3 पद भरे हुए है।  हालाकि इन तीन में से एक गायनिक डॉक्टर मेटेनिटी अवकाश पर है और फिलहाल 2 ही डॉक्टर्स के भरोसे पूरा अस्पताल चल रहा है।  इधर सीमलवाडा ब्लाक का ये सबसे बड़ा अस्पताल है जिसके चलते काफी वर्कलोड रहता है।  प्रतिदिन अस्पताल में 150 से 200 तक की ओपीडी रहती है वही 6 से।  डिलीवरी प्रतिदिन होती है।  वही डॉक्टर्स की कमी के चलते कार्यरत डॉक्टर्स पर वर्क लोड काफी होता है वही लेकिन डॉक्टर्स की कमी के अस्पताल में दिखाने आने वाले मरीजो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।  

सीमलवाडा अस्पताल में डॉक्टर्स की कमी के चलते यहाँ आने वाले मरीजो को कई बार तो इमेरजेंसी होने पर अस्पताल से बेरंग लौटना पड़ता है या फिर निजी अस्पताल में दिखाने को मजबूर होते है जिससे उनकी जेब भी ढीली होती है। वही निजी अस्पताल में अपना ईलाज व उपचार करवाने पर सरकार की निशुल्क योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता है।  

कार्यरत 2 डॉक्टर्स में से एक ने लिया अवेतनिक अवकाश 

इधर सीमलवाडा अस्पताल में डॉक्टर्स की कमी के चलते कार्यरत 2 डॉक्टर्स पर वर्क लोड होने से एक सीमलवाडा अस्पताल के प्रभारी डॉ कमलेश कटारा ने अवेतनिक अवकाश पर उतरना का निर्णय लिया है।  सीमलवाडा अस्पताल के प्रभारी डॉ कमलेश कटारा ने बताया की सीमलवाडा अस्पताल का कार्यक्षेत्र काफी बड़ा है जिसके वर्क लोड काफी रहता है। जिसके चलते डॉक्टर्स को मानसिक तनाव के भी गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में उन्होंने अवेतनिक अवकाश पर विभाग से अस्पताल में डॉक्टर्स लगाने की मांग की है।  

बहरहाल प्रदेश में सरकार बेहतर स्वास्थ्य व चिकित्सा सेवाए उपलब्ध करवाने की दावे करती हो लेकिन डूंगरपुर सीमलवाडा अस्पताल के ये हालात उन दावे की पोल खोल रहे है। इधर सीमलवाडा अस्पताल में एक तो पहले से डॉक्टर्स की कमी है वही 2 में से एक डॉक्टर के और अवेतनिक कार्य पर उतर जाने से अस्पताल की अव्यस्था और बिगड़ गई है। 


मरीज की जांच करते हुए डॉक्टर कमलेश कटारा। 

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