सरकार को आदेश 2015 परिपत्र की अवहेलना में सरिस्का एवं कुंभलगढ़ में ना हो कोई प्रतिबंधित निर्माण कार्य

 डूंगरपुर। अलवर निवासी कालूराम एवं डूंगरपुर निवासी वरुण गांधी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ऋतुराज सिंह ने सरिस्का बाघ परियोजना के 1 किलोमीटर दायरे में निर्माण कार्य एवं कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के 1 किलोमीटर दायरे में राजस्थान पर्यटन गेस्ट हाउस स्कीम को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की।

गौरतलब है कि परिपत्र मार्च 2015 के अनुसार सरिस्का, कुंभलगढ़, रणथंबोर एवं पाली के जवाई पैंथर कंजर्वेशन संरक्षित क्षेत्रों के सीमा से एक किलोमीटर तक नए वाणिज्यिक गतिविधियों पर रोक है साथ ही साथ उपरोक्त संरक्षित क्षेत्रों के 1 किलोमीटर तक भूमि परिवर्तन पर वेतन पर रोक है। 

याचिकाकर्ता द्वारा बताया गया कि क्योंकि परिपत्र 2015 द्वारा 1 किलोमीटर दायरे के अंदर वाणिज्यिक कार्य प्रतिबंधित है परंतु राज्य पर्यटन विभाग की गेस्ट हाउस स्कीम के अंतर्गत कुंभलगढ़ में आवासीय मकान में 20 कमरे तक के गेस्ट हाउस चलाए जा रहे हैं, क्योंकि गेस्ट हाउस स्कीम में बिना भू-परिवर्तन के आवासीय मकान में वाणिज्यिक गतिविधि करने का प्रावधान दे रखा है। 

याचिका में बताया गया कि सरिस्का टाइगर रिजर्व की सीमा से 1 किलोमीटर के दायरे के अंदर वाणिज्यिक निर्माण कार्य प्रगतिरत है, याचिकाकर्ता का गांव दधिकर जो कि टाइगर रिजर्व की सीमा से लगा हुआ है वहां पर वाणिज्यिक निर्माण हो रहा है एवं उस क्षेत्र में टाइगर ह्यह्ल 18 एवं ह्यह्ल 19 का निरंतर मूमेंट है।

पूर्व में सरकार द्वारा दधिकर गांव में पुलिस फायरिंग रेंज की स्थापना प्रस्तावित थी जिस पर क्षेत्रीय वन अधिकारी ने रिपोर्ट बना बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र में एसटी 19 मादा, ह्यह्ल18 नर बाघ, बघेरो, लकड़बग्घो, आदि का मूमेंट है क्योंकि क्षेत्र में प्राकृतिक जल स्तोत्र है। इसलिए सरकार द्वारा वहां पर फायरिंग रेंज का प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया।

याचिका में गूगल अर्थ एवं संरक्षित क्षेत्र की केएमएल फाइल के द्वारा 1 किलोमीटर दायरे के अंदर निर्माण कार्य दर्शाए गए। 

अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के पश्चात न्यायधीश मनिंदर मोहन श्रीवास्तव एवं मदन गोपाल व्यास की खंडपीठ ने सरकार से जवाब तलब किया एवं सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि परिपत्र 2015 की अवहेलना में कोई प्रतिबंधित निर्माण कार्य ना हो।

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