प्रसार कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण आयोजित


 डूंगरपुर। कृषि विज्ञान केन्द्र फलोज एवं महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा दो दिवसीय ‘समस्याग्रस्त मृदाओं का सुधार एवं प्रबंधन’ विषय पर प्रसार कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण के मुख्य अतिथि निदेशक प्रसार शिक्षा उदयपुर, डॉ आर.ए. कौशिक रहे। 

मुख्य अतिथि कौशिक ने बताया कि प्रसार कार्यकर्ता तकनिकी स्थानांतरण की रीढ है तथा आज के समय में कृषि की नवीनतम तकनीकियों को किसानों के खेत तक पहुंचाना आवश्यक है। इसलिए जरूरी है कि प्रसार कार्यकर्ताओं को नवीनतम तकनीकियों से समय समय पर अपडेट रहना चाहिए। 

उन्होंने ऑनलाईन माध्यम से प्रसार कार्यकश्र्रा को समस्याग्रस्त मृदाओं में समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जैविक खाद, मृदा की उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद की फसल के रूप में वर्षा ऋतु में ढैंचा लगाने, नवीनतम सिचांई तकनीकियों को अपनाने, मि_ी की जांच के आधार पर पौषक तत्वों के लिए रसायनिक खादों का प्रयोग, लवणीय मृदाओं में उपयुक्त फसलों का चयन एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का सन्तुलित प्रयोग करवाने का आह्वान किया।

एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ के. के यादव, राजस्थान कृषि महाविद्यालय उदयपुर ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न पहलुओं जैसे सिंचाई जल का वर्गीकरण का प्रभाव, लवणीय जल के हानिकारक प्रभाव, सिंचाई के लिए लवणीय/ क्षारीय जल का प्रयोग, लवणीय जल के प्रयोग के लिए प्रबंधन विधियाँ आदि पर प्रजेनटेशन से कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं का ज्ञान वर्धन किया। 

असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉ रोशन चौधरी राजस्थान कृषि महाविद्यालय उदयपुर ने जैविक खेती की विभिन्न तकनिकों जैसे  समुचित जुताई, मिट्टी एवं जल संरक्षण, मिश्रित कृषि फसलों एवं फसल चक्र, अंतर फसल, सहफसल, बहु फसलों का प्रयोग एवं किस्मों का चयन, हरी खाद, फसल में जैव उर्वरकों का प्रयोग, पंचगव्य, बीजामृत, जीवामृत बनाने की विधि एवं प्रयोग आदि के बारे में विस्तृत चर्चा की।

केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ बी. एल. रोत ने ग्रीष्मकालीन जुताई, फसल के चारो तरफ प्रपंच, फसलों के मित्र कीट जैसे लेडी बर्ड बीटल, क्राइसोपर्ला एवं सिरफीड फ्लाई के बचाव के लिए उचित व्यवस्था, खेतों में पीले चिपचिपे पाश लगाने, मृदा सौरीकरण एवं जैविक रोगनाशी पदार्थो के उपयोग के बारे में प्रकाश डाला। 

-----------------

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ