‘किचन गार्डन’ विषय पर तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण आयोजित


डूंगरपुर।
कृषि विज्ञान केन्द्र फलोज, डूंगरपुर (महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर) द्वारा अनुसुचित जाति उपयोजनान्तर्गत तीन दिवसीय किचन गार्डन विषय पर प्रशिक्षण आयोजित हुआ।

केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. सी.एम.बलाई ने बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्ेश्य अनुसुचित जाति कृषकों में किचन गार्डन का महत्व एंव उपयोगिता के बारे में जागरूक कर कृषक परिवार के पोषण स्तर को बढाना तथा घर में ताजी शाक-सब्जी का जैविक उत्पादन कर रसायन युक्त पौष्टिक सब्जियों को आहार में शामिल करना है। उन्होनें बताया कि कृषक किचन गार्डन से वर्ष भर ताजी सब्जियों उगा सकता है एवं घर में कूडे करकट का कम्पोस्ट खाद बना कर प्रयोग किया जा सकता है। किचन गार्डन से बाजार की तुलना में सस्ती एवं उत्तम गुणवत्ता वाली सब्जियों मिलती है। किचन गार्डन मकान की छत पर भी सफलता पूर्वक लगाया जा सकता है तथा इसे एक मन पसन्द शौक के रूप में भी अपनाया जा सकता है।

इस प्रशिक्षण में अनुसुचित जाति उपयोजना के परियोजना प्रभारी प्रो. अरविन्द वर्मा, अनुसंधान निदेशालय, उदयपुर ने आनलाईन माध्यम से कृषकों को अनुसुचित जाति उपयोजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह परियोजना महाराणा प्रताप कृषि एंव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा 7 जिलों में संचालित की जा रही है। इस परियोजना का मुख्य उदे्श्य अनुसुचित जाति कृषकों को नवीनतम कृषि तकनिकीयों के बारे में जागरूक करना तथा युवाओं में दक्षता निर्माण करना है। इसी के तहत दक्षता आधारित प्रशिक्षण आयोजित किये जा रहे है। प्रो. वर्मा ने इस प्रशिक्षण में उपस्थित पूर्व में सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त कर चूकी युवतियों से भी संवाद किया तथा सिलाई प्रशिक्षण उपरान्त स्वरोजगार से 1500-2000 रू. मासिक आय प्राप्त कर रही युवतियों का हौसला बढाया।

केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. बी. एल. रोत ने बीजोपचार तथा सब्जियों में कीट व्याधियों के जैविक प्रबन्धन पर प्रकाश डाला। तकनिकी सहायक एन. एल. अहारी ने कम्पोस्ट एवं वर्मीकम्पोस्ट निर्माण तकनिकी का प्रायौगिक प्रशिक्षण तथा तकनिकी सहायक के. सी. खराडी ने किचन गार्डन हेतु नर्सरी तैयार करने की विधि का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया। 

प्रशिक्षण समापन के अन्त में पुनित शर्मा ने सभी आगन्तुको एवं कृषकों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस प्रशिक्षण में कुल 35 कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया।


कैप्शन : 

किचन गार्डन हेतु नर्सरी तैयार करने की विधि का प्रायोगिक प्रशिक्षण देते। 

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